पुराना सोना बेचना — कीमत कैसे निकलती है, क्या-क्या कटता है
ख़रीदार पुराने गहने की कीमत कैसे लगाता है — शुद्धता की जाँच, नेट वज़न, दिन का रेट, कटौतियाँ — बेचने और बदलने में फ़र्क़, और टैक्स की जो बात ध्यान में रखनी है।
लेखक: Raghav Sangal ·
पुराना सोना धातु के लिए ख़रीदा जाता है। नया लेते वक़्त डिज़ाइन, मेकिंग चार्ज और दुकान के मार्जिन पर जो दिया था, वह अब कीमत का हिस्सा नहीं है। ख़रीदार जो देता है, वह एक सीधा गुणा है — सोने के ग्राम × उस शुद्धता का दिन का रेट — घटा वह सब जो ख़रीदार काटता है। हर पद को जानना ही पूरा गुर है।
1. शुद्धता
ख़रीदार पहले देखता है कि गहने में सोना कितना है। BIS हॉलमार्क बात तय कर देता है: 22K916 यानी 91.6% सोना, 18K750 यानी 75%। बिना हॉलमार्क का गहना जाँचा जाता है — कसौटी और तेज़ाब से, इलेक्ट्रॉनिक कैरेट मीटर से, या XRF मशीन से जो गहने को बिना नुक़सान पढ़ लेती है। नतीजा देखने की ज़िद करें। किसी दुकान की जाँच हॉलमार्क वाले गहने को निशान से कम बताए, तो गहना कहीं और जँचवाया जा सकता है; HUID वाला हॉलमार्क BIS Care ऐप में भी देखा जा सकता है।
2. नेट वज़न
गहना तुलता है, और नग, मीना, लाख की भराई और धागे या जो कुछ सोना नहीं है, वह घटता है। नग वाले गहनों में नग आम तौर पर निकाले जाते हैं या उनका वज़न अनुमान से घटाया जाता है; जो ख़रीदार नग वाली चूड़ी ग्रॉस तौलकर नग के भी सोने के पैसे दे, वह दरियादिल है, और जो नग के नाम पर खुलकर घटाए, वह कम। ग्रॉस वज़न, कटौती और नेट वज़न तीन अलग अंकों में माँगिए।
3. रेट
मिली शुद्धता पर ख़रीदार प्रति ग्राम रेट लगाता है। आधार उस फ़ाइननेस का IBJA रेट है — वही बेंचमार्क जो इस साइट के सोने के पेज 24, 22 और 18 कैरेट के लिए दिखाते हैं। ख़रीदार बेंचमार्क पर या उससे नीचे बोलते हैं; फ़र्क़ उनका मार्जिन है। दो ख़रीदारों की तुलना का मतलब है एक ही दिन, एक ही शुद्धता पर उनका प्रति ग्राम रेट मिलाना, और कुछ नहीं।
4. कटौतियाँ
आम कटौतियाँ हैं गलाई या रिफ़ाइनिंग के नाम पर एक प्रतिशत, जाँच का चार्ज, और बिना हॉलमार्क या कम शुद्धता के गहनों पर कम रेट। ये दुकानों के बीच बहुत बदलती हैं और यही कोटेशन के फ़र्क़ की मुख्य वजह हैं। कुछ ख़रीदार बिना कटौती साफ़ रेट बोलते हैं; कुछ बेंचमार्क बोलकर बाद में काटते हैं। तुलना के काबिल बस नेट वज़न के प्रति ग्राम आख़िरी रकम है।
बेचना बनाम बदलना
बेचने का मतलब है धातु के बदले ख़रीदार के रेट पर नक़द (या बैंक ट्रांसफ़र)। बदलने का मतलब है पुराना गहना नए के बदले देना: पुराने सोने की कीमत उसी तरह लगती है और नए बिल में घट जाती है। दुकानें अक्सर बदली पर सीधी बिक्री से अच्छी शर्तें देती हैं — कम कटौती, या बेंचमार्क रेट — क्योंकि नए गहने में मेकिंग चार्ज और मार्जिन है। बदली फ़ायदे की है या नहीं, यह इस पर है कि नया गहना आप यों भी लेना चाहते थे या नहीं; सुनार के बिल की गाइड बताती है कि नए बिल में क्या-क्या होगा।
काग़ज़ जो काम आते हैं
- पुराना बिल: उसमें वह शुद्धता और नेट वज़न दर्ज है जिस पर गहना बिका था।
- हॉलमार्क: शुद्धता की जाँच बचाता है, और HUID जाँचा जा सकता है।
- आपका पहचान-पत्र: ख़रीदार तय सीमा से ऊपर की ख़रीद पर इसे दर्ज करते हैं, और बैंक ट्रांसफ़र का रिकॉर्ड रहता है।
बिना बिल या हॉलमार्क का गहना भी बिकता है; बस उसकी कीमत जाँच से लगती है, और जाँच ही तय करती है।
टैक्स की बात
सोना एक पूँजीगत संपत्ति है। उसे बेचने पर हुआ मुनाफ़ा — बिक्री की रकम घटा लागत — पूँजीगत लाभ है, जिस पर आयकर अधिनियम के तहत टैक्स लगता है, इस हिसाब से कि सोना कितने समय रखा गया और बिक्री के साल में क्या नियम लागू हैं। नियम और दरें सालों में बदली हैं, इसलिए याद के भरोसे रहने की जगह चालू स्थिति आयकर विभाग के पोर्टल पर या किसी टैक्स सलाहकार से देखें; विरासत या उपहार में मिले सोने की लागत और अवधि के अपने नियम हैं। जहाँ लागू हो, ख़रीदार द्वारा स्रोत पर कटा टैक्स भुगतान में दिखता है।
यहाँ कुछ भी यह नहीं कहता कि बेचें या नहीं। यह बताता है कि कोटेशन कैसे पढ़ें: शुद्धता, नेट वज़न, रेट, कटौतियाँ — और तुलना सिर्फ़ प्रति ग्राम आख़िरी अंक की करें।
स्रोत
- IBJA — सोने-चाँदी के रोज़ के रेट — ibjarates.com
- BIS — हॉलमार्किंग की जानकारी — www.bis.gov.in
- आयकर विभाग — ई-फ़ाइलिंग पोर्टल (पूँजीगत लाभ) — www.incometax.gov.in
यह गाइड बताता है कि चीज़ें कैसे काम करती हैं; यह वित्तीय, टैक्स या क़ानूनी सलाह नहीं है। नियम और दरें बदलती रहती हैं — ऊपर दिए स्रोत आधिकारिक पेज हैं, वहीं देखें।
और गाइड
- 22 कैरेट, 24 कैरेट और 18 कैरेट सोना — शुद्धता, रेट और किस काम का
- BIS हॉलमार्क और HUID — गहने पर बने निशान क्या बताते हैं
- डायरेक्ट और रेगुलर म्यूचुअल फंड प्लान — फ़र्क़ बस एक लाइन का
- IBJA का सोने का रेट कैसे तय होता है, और सुनार ज़्यादा क्यों लेता है
- MSP पर ख़रीद कैसे होती है — रेट कौन तय करता है, ख़रीदता कौन है
- सुनार का बिल कैसे पढ़ें — हर लाइन का मतलब